काशीपुर। काशीपुर में पानी से भरे एक खाली प्लॉट में डूबने से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को शोक और आक्रोश से भर दिया है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी खाली प्लॉट में लंबे समय से पानी भरा हुआ था, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? क्या केवल प्लॉट मालिक जिम्मेदार है, या नगर निगम का भी यह दायित्व था कि ऐसे खतरनाक स्थानों की पहचान कर वहां से पानी की निकासी कराता, बैरिकेडिंग करवाता और चेतावनी बोर्ड लगवाता? यदि स्थानीय लोगों ने पहले भी इस संबंध में शिकायत की थी, तो उन शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बरसात के मौसम में शहर के कई खाली प्लॉट, गड्ढे और जलभराव वाले क्षेत्र हादसों का कारण बन जाते हैं। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने से हर वर्ष लोगों की जान जोखिम में पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते।
अब केवल शोक संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि आखिर इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। यदि किसी विभाग, अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही नगर निगम को तत्काल शहर के सभी जलभराव वाले खाली प्लॉटों और खतरनाक स्थलों का सर्वे कराकर पानी की निकासी, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
दो मासूमों की जान तो वापस नहीं लाई जा सकती, लेकिन यदि इस हादसे से भी सबक नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में ऐसी त्रासदियां फिर दोहराई जा सकती हैं। अब शहर की जनता यही पूछ रही है—क्या इन मासूमों की मौत के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी कुछ दिनों की चर्चा के बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा?

शहरयार आसिम
सम्पादक – काशीपुर समय
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