नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी पर शिकंजा कस दिया है। सरकार ने बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित कर दी है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता अब 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।
कन्फेक्शनरी से लेकर मिठाई कारोबार तक दायरे में
नई व्यवस्था के तहत कन्फेक्शनरी निर्माता, सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियां, फूड प्रोसेसिंग उद्योग, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल होंगे। ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने मौजूदा महीने को छोड़कर पिछले एक वर्ष में औसतन हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल किया है, वे निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

हालांकि, केंद्र एवं राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन तथा स्थानीय निकायों के संस्थानों को इस आदेश से छूट दी गई है।
GST रिटर्न से होगी खपत की निगरानी
सरकार चीनी मिलों द्वारा थोक ग्राहकों को सीधे अथवा डीलरों के माध्यम से की जाने वाली बिक्री पर भी निगरानी रखेगी। थोक उपभोक्ताओं की चीनी खपत का आकलन विक्रेता और खरीदार द्वारा संबंधित HSN कोड के आधार पर दाखिल किए गए GST रिटर्न से किया जाएगा।
एक साल में करीब 13 फीसदी महंगी हुई चीनी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह चीनी की कीमत में करीब 13 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की संभावना के बीच कीमतों में तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। इससे पहले भी सरकार ने डीलरों को चीनी का स्टॉक 30 दिन से अधिक नहीं रखने का निर्देश दिया था।
सरकार के ताजा फैसले का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी पर रोक लगाना, बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रित करना है।

शहरयार आसिम
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