(काशीपुर समय) औद्योगिक और धार्मिक महत्व रखने वाला काशीपुर इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियों का नया केंद्र बन गया है। नगर निगम की बागडोर संभालने के बाद भाजपा नेता दीपक बाली लगातार ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जिन्होंने आम लोगों की सोच और उम्मीदों को नया मोड़ दिया है।
काम पर केंद्रित नेतृत्व
फरवरी में पदभार ग्रहण करते ही बाली ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता केवल “काम” होगा, राजनीति नहीं। बीते सात महीनों में उनके फैसले इस बात को साबित कर रहे हैं। सड़क निर्माण की तेज़ रफ्तार, जलभराव की पुरानी परेशानी का समाधान और सफाई व्यवस्था में सुधार जैसे ठोस कदमों ने शहर के माहौल को बदल दिया है। इसी का असर है कि काशीपुर की हवा की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज हुआ है।
रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज पर बड़ी पहल
बाली का हाल का निर्णय सीधे जनता के हित से जुड़ा है। वर्षों से अटकी रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया अब दोबारा शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत यह काम अब केवल ₹1000 फाइल शुल्क और एक हलफ़नामे के साथ बिना अतिरिक्त फीस पूरा हो सकेगा। इस फैसले ने लोगों के लिए राहत के दरवाज़े खोल दिए हैं और मेयर की छवि एक निर्णायक और ईमानदार प्रशासक की बनी है।
संगठन में बढ़ती अहमियत
दीपक बाली का प्रभाव अब निगम की सीमा से आगे बढ़ चुका है। भाजपा संगठन में उनकी राय को महत्व दिया जाने लगा है और वरिष्ठ नेताओं के बीच उनकी पकड़ मज़बूत हो रही है।
विधायक चीमा के साथ तालमेल
काशीपुर के विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और मेयर बाली का तालमेल शहर में विकास कार्यों की रफ्तार को और तेज़ कर रहा है। दोनों नेताओं की संयुक्त कार्यशैली ने भाजपा को स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाया है, जिससे विपक्ष बैकफुट पर आ गया है।
भविष्य की राजनीति की ओर संकेत
नगर निगम का नेतृत्व पहली बार जमीनी समस्याओं के समाधान से सीधे जुड़ा हुआ दिख रहा है। यदि यही गति बरकरार रही तो आने वाले समय में दीपक बाली का कद केवल काशीपुर तक सीमित न रहकर उत्तराखंड की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बनकर सामने आएगा।

शहरयार आसिम
सम्पादक काशीपुर समय
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